Friday, 18 July 2014

अभिव्यक्तियाँ


मेरे मन की तेरे मन में,
तेरे मन की मेरे मन में,
कुछ उलझने ज़हन में,
बिना कहे तू समझ ले
बिना कहे मैं समझ लूँ,
कुछ हो रहें अभिव्यक्तियाँ.................

कुछ रिक्तियां कभी तू भरे,
कुछ रिक्तियां कभी मैं भरूं,
अनासक्तियों के वक़्त में,
कुछ हो रहें अभिव्यक्तियाँ...............

तेरे मौन को मैं तोड़ दूँ,
मेरे मौन को तू तोड़ दे,
फिर मौन साधें साथ में,
बने मौन भी अभिव्यक्तियाँ.....

तेरे दर्द में मैं रो पडूं,
मेरे दर्द में तू रो सके,
कभी भीग के पलकें बने,
तेरी मेरी अभिव्यक्तियाँ.......


तेरे हाथ में मैं हाथ धर,
हथेलियों में मन की बात धर,
कोई वक़्त हो जिसे थाम लूँ,
और थाम लूँ अभिव्यक्तियाँ..............

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