भूल जाती हूँ अक्सर कहते कहते,
गुम हो जाते हैं शब्द कहीं....
अनकही बातों के पर अनगिनत अर्थ निकल आते हैं,......................
मैं वक़्त के सिरे में नयी बात पिरोती हूँ,
और
अर्थ को कहती हूँ की कुछ शब्द ढूंढ लाये.............
गरीब की छबड़ी में रखी रोटी हुए मेरे शब्द,
मन की बात कहने को कभी पूरे नहीं पड़ते.................
तुम पूछते रहते हो न की आखिर क्या करती हूँ मैं दिन भर..........
मेरे कुछ शब्द खो गए हैं,
मैं वो शब्द खोजती हूँ..............................
गुम हो जाते हैं शब्द कहीं....
अनकही बातों के पर अनगिनत अर्थ निकल आते हैं,......................
मैं वक़्त के सिरे में नयी बात पिरोती हूँ,
और
अर्थ को कहती हूँ की कुछ शब्द ढूंढ लाये.............
गरीब की छबड़ी में रखी रोटी हुए मेरे शब्द,
मन की बात कहने को कभी पूरे नहीं पड़ते.................
तुम पूछते रहते हो न की आखिर क्या करती हूँ मैं दिन भर..........
मेरे कुछ शब्द खो गए हैं,
मैं वो शब्द खोजती हूँ..............................