बच्चों को नहीं आता खुद को समझाना,
उन्हें समझदारी का तमगा नहीं लुभाता,
वो बस जानते हैं मचलना, ज़िदें करना,
बीच सड़क पे फ़ैल जाना,
अपनी पसंद के खिलौनों के लिए....................
बच्चे नहीं देखते की उन्हें देख रहा है कोई,
उनकी शैतानियों पे, बदमाशियों पे,
नहीं पड़ता फ़र्क़ किसी की तीखी नज़र से,
वो नहीं मानते किये बिना,
जो ठान लें एक बार करने का......................
बच्चे नहीं चाहते सुनना की कौन क्या कह रहा है उनके बारे में,
वो अपनी आवाज़ कम नहीं करते,
वो चिल्लाते हैं, गाते हैं,
रोते हैं, बातें करते हैं,
दिल और गला खोल कर....................
बच्चे नहीं सोचते कुछ कहने से पहले,
वो कह देते हैं सीधी सच्ची दिल की बात,
किसी के भी सामने बिना किसी डर के,
बच्चे परिणामों की फ़िक्र नहीं करते....................
बच्चे नहीं बनाते योजनाएं,
क़दम उठाने से पहले,
वो बस निकल पड़ते हैं,
बच्चों के पास नहीं होता वक़्त,
रुकने का सोचने का................
बस एक बार फिर बच्ची बन जाऊं मैं,
तो फ़ेंक दूँ, दूर सर से उठाकर समझदारी के टोकरे,
सीखूं फिर से ज़िदें करना, मचलना, चिल्लाना, गाना, रोना, बातें करना,
निडर हो, मन से जीना, मन का करना,
परिणामों की सुध लिए बिना,
कदम उठाना और बस निकल पड़ना.................................
उन्हें समझदारी का तमगा नहीं लुभाता,
वो बस जानते हैं मचलना, ज़िदें करना,
बीच सड़क पे फ़ैल जाना,
अपनी पसंद के खिलौनों के लिए....................
बच्चे नहीं देखते की उन्हें देख रहा है कोई,
उनकी शैतानियों पे, बदमाशियों पे,
नहीं पड़ता फ़र्क़ किसी की तीखी नज़र से,
वो नहीं मानते किये बिना,
जो ठान लें एक बार करने का......................
बच्चे नहीं चाहते सुनना की कौन क्या कह रहा है उनके बारे में,
वो अपनी आवाज़ कम नहीं करते,
वो चिल्लाते हैं, गाते हैं,
रोते हैं, बातें करते हैं,
दिल और गला खोल कर....................
बच्चे नहीं सोचते कुछ कहने से पहले,
वो कह देते हैं सीधी सच्ची दिल की बात,
किसी के भी सामने बिना किसी डर के,
बच्चे परिणामों की फ़िक्र नहीं करते....................
बच्चे नहीं बनाते योजनाएं,
क़दम उठाने से पहले,
वो बस निकल पड़ते हैं,
बच्चों के पास नहीं होता वक़्त,
रुकने का सोचने का................
बस एक बार फिर बच्ची बन जाऊं मैं,
तो फ़ेंक दूँ, दूर सर से उठाकर समझदारी के टोकरे,
सीखूं फिर से ज़िदें करना, मचलना, चिल्लाना, गाना, रोना, बातें करना,
निडर हो, मन से जीना, मन का करना,
परिणामों की सुध लिए बिना,
कदम उठाना और बस निकल पड़ना.................................
