Saturday, 6 December 2014

मासूम सी एक कोशिश.......



एक मासूम सी कोशिश है वो,
कुछ दिनों से हाथ पकड़ कर कहीं खींच रही है,
कुछ दिखाना चाहती है,
कुछ बताना चाहती है,
कुछ लिखवा देना चाहती है मुझसे........

एक मासूम सी कोशिश है वो,
मेरे दुपट्टे को नन्ही उँगलियों में घुमाकर,
अपनी बातों से मेरे मन को लुभाकर,
मनवा रही है अपनी सारी जिद्दियाँ,
करवा रही है मुझसे सबकुछ जो वो चाहती है.......

एक मासूम सी कोशिश है वो,
मेरी किताबों में नए रंग भर रही है,
खूम मनमानियां कर रही है,
कभी कभी ज़रा ज़रा डर रही है
पर रुकने का कोई नाम नहीं,
न थकती है, न मुझे थकने देती है....

एक मासूम सी कोशिश है वो,
देर तक सोती नहीं, सुबह जल्दी उठ जाती है,
अपनी अठखेलियों से हर वक़्त गुदगुदाती है,
काम के वक़्त चुपके से आती है, छेड़ती है, भाग जाती है,
पर जो एक पल भी ओझल हो जाये तो बेचैन हो जाती हूँ मैं.......

एक मासूम सी कोशिश है वो ,
मैं हूँ इस वजह से की वो मेरे साथ है,
उसके होने से ही जीवन में जीवन सी बात है,
वो न हो तो जीने को बस दिन है रात है,
मेरी एक मासूम सी कोशिश है वो........................

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